आईडीएफसी फर्स्ट बैंक का वित्त वर्ष 26 की दूसरी तिमाही का कर-पश्चात लाभ 352 करोड़ रुपए; पिछले वर्ष की तुलना में 76% अधिक

आईडीएफसी फर्स्ट बैंक ने 30 सितंबर, 2025 को समाप्त हुई तिमाही और अर्धवार्षिक अवधि के लिए बगैर ऑडिट किए हुए वित्तीय परिणाम जारी किए हैं परिणामों पर टिप्पणी करते हुए, श्री वी. वैद्यनाथन, प्रबंध निदेशक और सीईओ, आईडीएफसी फर्स्ट बैंक, ने कहा, “एमएफआई व्यवसाय में जो दबाव था, वह पूरी तरह से एमएफआई उद्योग की समस्या थी और अब यह धीरे-धीरे कम होता दिख रहा है। एमएफआई को छोड़कर, आईडीएफसी बैंक की परिसंपत्ति गुणवत्ता दशकों से स्थिर रही है और 30 सितंबर, 2025 को सकल एनपीए 1.86% और शुद्ध एनपीए 0.52% के साथ यह स्थिर बनी हुई है। जहाँ तक फंड की लागत का सवाल है, हमें उम्मीद है कि यह अब धीरे-धीरे घटने लगेगी। बैंक को संचालन में बेहतर लाभप्रदता दिखाई दे रही है। उदाहरण के लिए, वित्त वर्ष 25 में कुल व्यवसाय यानि ऋण और ग्राहक जमा 22.7% सालाना बढ़त दर्ज की गई, जबकि परिचालन व्यय में 16.5% बढ़ोतरी हुई। इसी क्रम में, वित्त वर्ष 26 की पहली छमाही में कुल व्यवसाय 21.6% बढ़ा, जबकि परिचालन व्यय में 11.8% की वृद्धि हुई। हम उम्मीद करते हैं कि यह रुझान भविष्य में भी जारी रहेगा।”

टिप्पणियाँ:

1. बैंक के ऋण और अग्रिमों में सालाना 94% वृद्धि आवास ऋण, वाहन ऋण, उपभोक्ता ऋण, बिज़नेस बैंकिंग, एमएसएमई ऋण और थोक ऋण में हुई वृद्धि के कारण रही।
2. 30 सितम्बर, 2025 तक माइक्रोफाइनेंस पोर्टफोलियो में सालाना 41.6% की कमी दर्ज की गई। 30 सितम्बर, 2024 को जहाँ एमएफआई पोर्टफोलियो बैंक की कुल वित्तपोषित परिसंपत्तियों का 5.6% था, वहीं यह घटकर 2.7% रह गया।
3. वित्त वर्ष 26 की दूसरी तिमाही में बैंक द्वारा जारी क्रेडिट कार्ड्स की संख्या 40 लाख तक पहुँच गई।
4. प्राइवेट वेल्थ मैनेजमेंट का एयूएम सालाना 28% बढ़कर 54,693 करोड़ रुपए पर पहुँच गया।
5. बैंक के परिसंपत्ति गुणवत्ता संकेतक, जिसमें सकल एनपीए, शुद्ध एनपीए, एसएमए और प्रावधान शामिल हैं, स्थिर बने हुए हैं। एमएफआई व्यवसाय की परिसंपत्ति गुणवत्ता में और सुधार हुआ है।
6. तिमाही के दौरान प्रावधानों में तिमाही-दर-तिमाही 12.5% की कमी दर्ज की गई, जो 1,659 करोड़ रुपए से घटकर 1,452 करोड़ रुपए रह गई। माइक्रोफाइनेंस पोर्टफोलियो में कम प्रावधान होना इसका मुख्य कारण रहा।
7. माइक्रोफाइनेंस में दबाव कम होने के कारण बैंक ने वित्त वर्ष 26 की दूसरी तिमाही में 75 करोड़ रुपए के माइक्रोफाइनेंस प्रावधान बफर का उपयोग किया, जबकि 240 करोड़ रुपए का आकस्मिक प्रावधान अभी भी बरकरार रखा गया है।
8. 7,500 करोड़ रुपए की सीसीपीएस पूँजी को इक्विटी में परिवर्तित किए जाने के बाद, 30 सितम्बर, 2025 तक के वित्तीय आँकड़ों के आधार पर पूँजी पर्याप्तता अनुपात 16.82% और टियर-I अनुपात 14.75% होगा।

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