कोलकाता।बिरला कॉर्पोरेशन लिमिटेड की सितंबर तिमाही में समेकित (कंसोलिडेटेड) आय पिछले साल की समान अवधि के 2,233 करोड़ रुपये से 9 प्रतिशत बढ़कर 2,441 करोड़ रुपये हो गई। इस तिमाही के दौरान सीमेंट की कीमतें कमजोर रहीं और अत्यधिक बारिश के कारण कंपनी के प्रमुख बाजारों में निर्माण गतिविधियां प्रभावित हुईं।तिमाही के दौरान कंपनी की सीमेंट बिक्री मात्रा सालाना आधार पर 7 प्रतिशत बढ़कर 45.4 लाख टन हो गई, जबकि प्रति टन प्राप्ति 2 प्रतिशत बढ़कर 4,925 रुपये रही। हालांकि, जुलाई और अगस्त के दौरान प्रमुख बाजारों में सीमेंट की कीमतें कमजोर होने के कारण पिछली तिमाही की तुलना में इसमें मामूली गिरावट दर्ज की गई।पूरी तिमाही के दौरान सीमेंट इंडस्ट्री में प्रति टन प्राप्ति पूर्वी भारत में 3 प्रतिशत घट गई, जबकि मध्य भारत में स्थिर रही। पश्चिमी और उत्तरी भारत में मामूली सुधार देखने को मिला।तिमाही के दौरान क्षमता उपयोग 85 प्रतिशत पर बना रहा, जो पिछले साल के समान स्तर पर था। हालांकि, इनपुट लागत में अप्रत्याशित वृद्धि के कारण लाभप्रदता प्रभावित हुई। कमजोर कीमतों के चलते लागत में हुई वृद्धि की भरपाई नहीं हो सकी। क्लिंकर की लागत में 13 प्रतिशत, जबकि बिजली और ईंधन की लागत में सालाना आधार पर 15 प्रतिशत की वृद्धि हुई। इसकी प्रमुख वजह पेट कोक की कीमतों में पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 64 प्रतिशत की बढ़ोतरी रही। तिमाही के दौरान सीमेंट डिवीजन का प्रति टन एबिटिडा 482 रुपये रहा, जबकि पिछले साल की समान अवधि में यह 712 रुपये था।लागत के दबाव को कम करने के लिए कंपनी ने ग्रीन एनर्जी की खपत बढ़ाकर तिमाही में 32 प्रतिशत कर दी, जबकि पिछले साल की समान अवधि में यह 30 प्रतिशत थी। इसके अलावा, कंपनी ने सितंबर तिमाही के दौरान मध्य प्रदेश स्थित अपनी बिक्रम कोयला खदान से कोयला निकालना शुरू कर दिया। खदान में उत्पादन धीरे-धीरे बढ़ाया जा रहा है। उम्मीद है कि चालू वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में यहां से 1.80 लाख टन कोयले का उत्पादन होगा, जिससे ईंधन लागत में उल्लेखनीय कमी आएगी।बिरला कॉर्पोरेशन का इस तिमाही में कंसोलिडेटेड एबिटिडा 254 करोड़ रुपये रहा, जबकि पिछले साल की समान अवधि में यह 332 करोड़ रुपये था। कंपनी का कंसोलिडेटेड शुद्ध लाभ पिछले साल के 90 करोड़ रुपये के मुकाबले घटकर 37 करोड़ रुपये रह गया। सीमेंट डिवीजन का एबिटिडा मार्जिन सालाना आधार पर 490 आधार अंक घटकर 9.8 प्रतिशत पर आ गया।कंपनी ने अपनी घोषित रणनीति के अनुरूप मिक्स सीमेंट की बिक्री बढ़ाने पर ध्यान जारी रखा। तिमाही के दौरान कुल सीमेंट बिक्री में मिक्स सीमेंट की हिस्सेदारी 86 प्रतिशत रही। इसकी बिक्री मात्रा में सालाना आधार पर 4 प्रतिशत की वृद्धि हुई। महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, बिहार और राजस्थान से इसमें उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई। कुंडागंज और मुकुटबन मंन हाल ही में शुरू की गई उत्पादन यूनिट्स से बिक्री में क्रमशः 20 प्रतिशत और 8 प्रतिशत की वृद्धि हुई।इसी तरह, प्रीमियम उत्पादों की बिक्री में भी तिमाही के दौरान 17 प्रतिशत की अच्छी वृद्धि दर्ज की गई। इसकी बिक्री मात्रा पिछले साल की समान अवधि के 20.2 लाख टन से बढ़कर 23.8 लाख टन हो गई। कंपनी के प्रमुख ब्रांड परफेक्ट प्लस की बिक्री में भी सालाना आधार पर 21 प्रतिशत की वृद्धि जारी रही। व्यापारिक माध्यम से कंपनी की कुल बिक्री में प्रीमियम सीमेंट की हिस्सेदारी बढ़कर 64 प्रतिशत हो गई, जबकि पिछले साल की समान अवधि में यह 61 प्रतिशत थी।उच्च क्षमता उपयोग को देखते हुए बिरला कॉर्पोरेशन लिमिटेड ने अधिक लाभ देने वाले व्यापारिक माध्यम से बिक्री पर अपना ध्यान बनाए रखा है। सितंबर तिमाही में इस माध्यम से कंपनी की बिक्री 82 प्रतिशत रही, जबकि पिछले साल की समान अवधि में यह 79 प्रतिशत थी।
जूट कारोबार: कच्चे जूट की गंभीर कमी के बावजूद जूट डिवीजन ने इस तिमाही में 13.01 करोड़ रुपये का नकद लाभ दर्ज किया, जबकि पिछले साल की समान अवधि में यह 4.64 करोड़ रुपये था। आपूर्ति में कमी के कारण बिरला जूट को कामकाज के दिनों में कटौती कर उत्पादन को तर्कसंगत बनाना पड़ा। इसके परिणामस्वरूप तिमाही में उत्पादन मात्रा सालाना आधार पर 26 प्रतिशत घट गई।
हालांकि, बेहतर बिक्री मूल्य मिलने के कारण बिरला जूट ने तिमाही में आय में 17 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की। निर्यात बिक्री में 143 प्रतिशत और शॉपिंग बैग की बिक्री में 64 प्रतिशत की वृद्धि के चलते जूट डिवीजन की आय पिछले साल की समान अवधि के 132 करोड़ रुपये से बढ़कर 155 करोड़ रुपये हो गई। इसके परिणामस्वरूप बिरला जूट का तिमाही परिचालन लाभ पिछले साल के 4.02 करोड़ रुपये से बढ़कर 6.16 करोड़ रुपये हो गया।
आगे की संभावनाएं: अक्टूबर से सीमेंट बिक्री पर मिलने वाले मूल्य में सुधार शुरू हो गया है, क्योंकि निर्माण गतिविधियां दोबारा गति पकड़ रही हैं। बेसिक इंफ्रास्ट्रक्चर पर सरकारी खर्च को विकास का प्रमुख कारक माना जा रहा है। निजी क्षेत्र में भी निर्माण गतिविधियों में धीरे-धीरे सुधार हो रहा है। हालांकि, लागत का दबाव बना रहेगा और इससे कुल लाभप्रदता प्रभावित हो सकती है।