हर दिन पोषण, हर बूंद में बढ़त — शून्य एग्रीटेक बदल रहा है ग्रामीण डेयरी की तस्वीर।

कानपुर :– शून्य एग्रीटेक एक रूरल-फर्स्ट एनिमल न्यूट्रीशन और हेल्थ प्लेटफॉर्म है जो भारत में डेयरी प्रोडक्टिविटी, किसानों की इनकम और गांव की गरिमा को बेहतर बनाने के मिशन पर काम कर रहा है। यह प्लेटफॉर्म साइंस-बेस्ड और लोकल ज़रूरतों के हिसाब से नई तरह की फॉडर और वेलनेस सर्विसेस तैयार कर रहा है। शून्य एग्रीटेक के एमडी और सीईओ विजय सिंह कहते हैं। शून्य एग्रीटेक, भारत के 10 करोड़ से ज्यादा डेयरी फार्मिंग करने वाले घरों को सशक्त कर रहे है, ताकि वे एक बहुत ज़रूरी लेकिन अक्सर अनदेखी की गई खेती से जुड़ी प्रॉब्लम को सॉल्व कर सकें — दुनिया का सबसे बड़ा मिल्क प्रोड्यूसर होने के बावजूद, भारत की पर-एनिमल मिल्क यील्ड अभी भी ग्लोबल एवरेज से 50 प्रतिशत कम है।
जबकि मिल्क भारत की जीडीपी में 5 प्रतिशत से ज़्यादा का कॉन्ट्रिब्यूशन देता है और रूरल हाउसहोल्ड इनकम में करीब 30 प्रतिशत हिस्सेदारी रखता है, शून्य एग्रीटेक का काम सिर्फ बेटर न्यूट्रीशन तक सीमित नहीं है — यह रूरल इंडिया की इकोनॉमिक बैकबोन को स्ट्रॉन्ग बनाने की दिशा में एक बड़ा स्टेप है।
शून्य एग्रीटेक ने सब्सक्रिप्शन मॉडल के ज़रिए पोषक तत्वों से भरपूर हाइड्रोपोनिक ग्रीन फॉडर की डिलीवरी करके ग्रामीण भारत में कैटल न्यूट्रीशन तक पहुंचने का तरीका पूरी तरह बदल दिया है। कंपनी एनवायरमेंट-कंट्रोल्ड हाइड्रोपोनिक यूनिट्स में उच्च गुणवत्ता वाला चारा उगाती है, जो पारंपरिक तरीकों की तुलना में 90% कम पानी का उपयोग करता है, ज़ीरो वेस्ट पैदा करता है और मौसम या वर्षा के बदलावों से प्रभावित नहीं होता। इसका लाभ यह है कि किसानों को सालभर – 365 दिन – जलवायु-प्रतिरोधी फॉडर मिलता है।
इस समय शून्य एग्रीटेक रोज़ाना 8,000 से ज़्यादा किसानों को अपनी सर्विस दे रहा है, जिनमें कानपुर देहात, आगरा रूरल, गुरुग्राम और सरिस्का जैसे मुख्य इलाके शामिल हैं। कंपनी ने लोकल लेवल पर ग्रोथ एंड लॉजिस्टिक्स सेंटर्स (जीएलसी) और शून्य सारथी सेंटर्स (एसएससी) का एक नेटवर्क तैयार किया है, जो फीड का प्रोडक्शन, डिस्ट्रीब्यूशन और लास्ट-माइल डिलीवरी संभालते हैं। किसान या तो इन सेंटर्स से खुद फीड लेने आते हैं, या ज़्यादातर मामलों में उन्हें यह फीड सीधे उनके डोरस्टेप पर मिल जाता है — यह सब एक टेक-इनेबल्ड, हाइपरलोकल डिलीवरी मॉडल के ज़रिए होता है, जो सबसे दूर-दराज़ गांवों में भी एक “स्विगी-जैसा” एक्सपीरियंस देता है।
शून्य एग्रीटेक के फॉडर का असर तुरंत और साफ तौर पर नज़र आता है। सिर्फ़ 7 से 8 दिन के अंदर जब किसान शून्य का फॉडर देना शुरू करते हैं, तो दूध की मात्रा में बढ़ोतरी दिखने लगती है। सबसे ज़रूरी बात यह है कि दूध की क्वालिटी भी बेहतर होती है — फैट और एसएनएफ (सॉलिड्स-नॉट-फैट) का प्रतिशत बढ़ जाता है। एक साल में औसतन हर पशु के लिए किसान को करीब 30 अतिरिक्त लैक्टेशन डेज़ मिलते हैं, जिससे बिना ज़्यादा मेहनत के उनकी इनकम बढ़ जाती है।
बेहतर न्यूट्रीशन की वजह से दूध की क्वालिटी और फैट-एसएनएफ कंटेंट में बढ़ोतरी होती है, जिससे किसान को हर जानवर पर रोज़ाना करीब 65 से 75 रुपये तक की एक्स्ट्रा इनकम होती है। साथ ही, शून्य का फॉडर 30–35 प्रति किलो के महंगे कन्सन्ट्रेट फीड की जगह लेता है, जिससे छोटे किसानों के इनपुट कॉस्ट में भी अच्छी-खासी कटौती होती है। यह उस बड़ी राष्ट्रीय समस्या को भी एड्रेस करता है, जहां देशभर में हर दिन 200–300 करोड़ रुपए सिर्फ़ अनरिलायबल डेयरी सप्लीमेंट्स पर खर्च हो जाते हैं।
एक और बड़ा फ़ायदा यह है कि जो ज़मीन पहले बारसीम या नैपियर जैसे ग्रीन फॉडर उगाने में इस्तेमाल होती थी, वह अब किसान के लिए फ्री हो जाती है — जिससे वह वहां कैश क्रॉप्स उगाना शुरू कर सकता है।
खासतौर पर महिलाओं के लिए, जिन पर परंपरागत रूप से हाथ से चारा काटने और ढोने की जिम्मेदारी होती है, शून्य की यह सर्विस वाकई में ट्रांसफॉर्मेशनल साबित हुई है। यह लेबर-इंटेंसिव काम खत्म होने से हर साल हजारों घंटे बच रहे हैं, जिससे रूरल महिलाएं अब इनकम जनरेट करने वाले कामों, पढ़ाई या फिर थोड़ा आराम करने में यह समय इस्तेमाल कर पा रही हैं।
शून्य एग्रीटेक का पूरा ऑपरेशन पर्दे के पीछे एक सेंट्रलाइज्ड डिजिटल कमांड हब से चलाया जाता है, जो गुरुग्राम में स्थित है। हाल ही में शून्य एग्रीटेक ने अपना मोबाइल ऐप लॉन्च किया है, जिसे अब तक 1,000 से ज़्यादा बार डाउनलोड किया जा चुका है। यह ऐप किसानों के लिए एक डिजिटल लाइवस्टॉक कमांड सेंटर की तरह काम करता है — जिसमें उन्हें रियल-टाइम फीड ट्रैकिंग, वेटरनरी सपोर्ट, किसान समुदाय से जुड़ाव और एआई-पावर्ड गाइडेंस मिलती है ताकि पशुओं की सेहत और बीमारियों से बचाव को बेहतर बनाया जा सके।
“पैंडेमिक के दौरान मैंने शहरों की भागदौड़ से दूर भारत के गांवों में वक्त बिताया और अपनी आंखों से देखा कि रूरल डेयरी फार्मर्स किन बड़ी चुनौतियों से जूझते हैं — खासकर गाय-भैंसों के लिए सही ग्रीन फॉडर की कमी
शून्य एग्रीटेक की महत्वाकांक्षा सिर्फ उत्तर भारत तक सीमित नहीं है। कंपनी अब गुजरात, महाराष्ट्र और बिहार में भी विस्तार की तैयारी कर रही है, जो कि उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान में पहले से चल रहे ऑपरेशन्स के अलावा है। शून्य एग्रीटेक का लक्ष्य है एक मजबूत, टेक-फर्स्ट डेयरी इकोसिस्टम तैयार करना — जो किसानों को क्लाइमेट चेंज के बीच भी मज़बूत बनाए, उनकी इनकम बढ़ाए और गांवों में लंबे समय तक चलने वाली समृद्धि की नींव रखे।
इसके इनोवेशन और प्रभाव को पहचानते हुए, शून्य एग्रीटेक को 2025 के प्रेस्टिजियस इनोवा यूरोप अवॉर्ड्स में भारत का प्रतिनिधित्व करने वाली इकलौती भारतीय कंपनी के रूप में चुना गया है।
एक ऐसा सेक्टर जिसे लंबे समय से इनोवेशन की ज़रूरत थी, वहां शून्य एग्रीटेक सिर्फ बेहतर चारा नहीं बना रहा — वह एक आधुनिक डेयरी भविष्य की नींव रख रहा है। ऐसा भविष्य जहाँ फैसले डेटा के आधार पर लिए जाएंगे, जहाँ ग्रामीण महिलाएं हाथ से चारा काटने जैसे मेहनत वाले काम से आज़ाद होंगी, और जहाँ किसान टिकाऊ खेती और अपने जीवन यापन के बीच कोई समझौता नहीं करेंगे।

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