देश-विदेश के श्रद्धालु ‘श्री मंदिर’ ऐप से कर सकेंगे पूजा और चढ़ावा
लखनऊ:– श्रावण और नवरात्रि के पावन अवसरों से पहले कांगड़ा जिला प्रशासन ने ‘श्री मंदिर’ ऐप के साथ मिलकर जिले के दो और ऐतिहासिक मंदिरों में डिजिटल पूजा सेवाओं का विस्तार किया है। इस पहल के माध्यम से भारत सहित दुनिया भर के श्रद्धालु मंदिर की मर्यादा और परंपराओं के अनुरूप अधिकृत पूजा में दूरस्थ रूप से भाग ले सकेंगे और पारंपरिक चढ़ावा अर्पित कर सकेंगे।‘श्री मंदिर’ ऐप के संस्थापक एवं सीईओ प्रशांत सचान ने कहा, “मंदिर सेवाओं के डिजिटलीकरण को आगे बढ़ाने के लिए कांगड़ा जिला प्रशासन और मंदिर प्राधिकरणों के साथ जुड़ना हमारे लिए सम्मान की बात है। ‘श्री मंदिर’ ऐप के माध्यम से उपलब्ध प्रत्येक सेवा संबंधित मंदिर प्रबंधन के निकट समन्वय और स्थापित परंपराओं के अनुरूप संपन्न की जाती है। इससे दुनिया भर के श्रद्धालु मंदिर अनुष्ठानों की प्रामाणिकता बनाए रखते हुए अपनी आस्था से जुड़े रह सकते हैं।”
यह विस्तार विशेष रूप से वरिष्ठ नागरिकों, प्रवासी भारतीयों, दिव्यांगजनों और उन श्रद्धालुओं के लिए उपयोगी होगा जो स्वास्थ्य, आर्थिक, व्यावसायिक या भौगोलिक कारणों से स्वयं मंदिर नहीं पहुंच पाते। ‘श्री मंदिर’ ऐप पर उपलब्ध प्रत्येक सेवा संबंधित मंदिर प्रबंधन के निकट समन्वय में संपन्न की जाती है, ताकि पूजा की प्रामाणिकता और स्थापित परंपराएं पूरी तरह सुरक्षित रहें।
श्री बज्रेश्वरी देवी मंदिर और श्री चामुंडा देवी मंदिर में डिजिटल पूजा एवं चढ़ावा सेवाओं की सफल शुरुआत और देशभर के श्रद्धालुओं की उत्साहजनक भागीदारी के बाद अब यह सुविधा श्री बैजनाथ मंदिर और श्री महाकाल मंदिर तक बढ़ाई गई है। नागर शैली की वास्तुकला के लिए प्रसिद्ध श्री बैजनाथ मंदिर करीब 800 वर्ष पुराना शिव मंदिर है। वहीं मध्यकालीन श्री महाकाल मंदिर भगवान शिव को समर्पित एक प्रतिष्ठित धाम है, जिसके बारे में मान्यता है कि यहां पूजा करने से श्रद्धालुओं को शांति और आध्यात्मिक मुक्ति की प्राप्ति होती है।
प्रारंभिक चरण में शामिल दोनों मंदिरों के माध्यम से करीब 60,000 श्रद्धालु ‘श्री मंदिर’ ऐप पर अधिकृत डिजिटल पूजा और पारंपरिक चढ़ावा सेवाओं से जुड़े। श्री बज्रेश्वरी देवी मंदिर में कुल भागीदारी का लगभग 27 प्रतिशत महाराष्ट्र से रहा। इसके बाद दिल्ली-एनसीआर से 23 प्रतिशत, उत्तर प्रदेश से 19 प्रतिशत और कर्नाटक से 10 प्रतिशत श्रद्धालु जुड़े। ये आंकड़े दर्शाते हैं कि भौगोलिक दूरी के बावजूद कांगड़ा के प्रतिष्ठित मंदिरों से डिजिटल रूप से जुड़ने की मांग लगातार बढ़ रही है।
कांगड़ा जिला प्रशासन के एक अधिकारी ने कहा, “कांगड़ा भारत के कई प्रतिष्ठित मंदिरों और समृद्ध आध्यात्मिक विरासत का केंद्र है। तकनीक के जिम्मेदार उपयोग के माध्यम से हमारा प्रयास इन पवित्र स्थलों को उन श्रद्धालुओं के लिए अधिक सुलभ बनाना है जो व्यक्तिगत रूप से यहां नहीं आ सकते। साथ ही, इससे जिले की समृद्ध सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत को व्यापक दर्शक वर्ग तक पहुंचाने में भी सहायता मिलेगी।”
यह पहल मंदिर सेवाओं को अधिक सुलभ बनाने के साथ-साथ कांगड़ा की समृद्ध धार्मिक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को देश-दुनिया तक पहुंचाने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम है। तकनीक के जिम्मेदार उपयोग से जिले के प्राचीन मंदिरों की पहुंच का विस्तार होगा और श्रद्धालु अपने स्थान की परवाह किए बिना अपनी आस्था और परंपराओं से जुड़े रह सकेंगे।