हल्द्वानी:आरजीसीआईआरसी (राजीव गांधी कैंसर संस्थान एवं अनुसंधान केंद्र) ने इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए), हल्द्वानी के सहयोग से 25 जुलाई 2026 को होटल आईटीसी फॉर्च्यून वॉकवे, हल्द्वानी में ऑन्कोलॉजी कंटीन्यूइंग मेडिकल एजुकेशन (सीएमई) कार्यक्रम का सफल आयोजन किया। इस शैक्षणिक कार्यक्रम में हल्द्वानी और आसपास के क्षेत्रों के चिकित्सकों एवं स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने भाग लिया। कार्यक्रम का मुख्य विषय आधुनिक रेडिएशन ऑन्कोलॉजी की बदलती भूमिका और कैंसर मरीजों के जीवन की गुणवत्ता को बेहतर बनाने के नए तरीकों पर केंद्रित रहा।
इस सीएमई का उद्देश्य साक्ष्यआधारित कैंसर उपचार को बढ़ावा देना, विभिन्न विशेषज्ञों के बीच सहयोग को मजबूत करना तथा चिकित्सकों को कैंसर की पहचान, उपचार और उपचार के बाद की देखभाल से जुड़ी नवीनतम जानकारियों से अवगत कराना था। कार्यक्रम ने यह भी रेखांकित किया कि चिकित्सा क्षेत्र में लगातार सीखना और ज्ञान का आदानप्रदान मरीजों को बेहतर उपचार उपलब्ध कराने के लिए अत्यंत आवश्यक है।
“एडवांसेज़ इन रेडिएशन ऑन्कोलॉजी फ्रॉम क्योर टू क्वालिटी ऑफ लाइफ” विषय पर मुख्य व्याख्यान देते हुए आरजीसीआईआरसी, नई दिल्ली के वरिष्ठ सलाहकार एवं यूनिट प्रमुख (रेडिएशन ऑन्कोलॉजी) डॉ. कुंदन सिंह चुफाल ने बताया कि आधुनिक रेडिएशन थेरेपी अब केवल कैंसर को नियंत्रित करने तक सीमित नहीं है, बल्कि मरीजों के अंगों की कार्यक्षमता को सुरक्षित रखते हुए उनकी जीवन गुणवत्ता बेहतर बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
वास्तविक मरीजों के उदाहरणों के माध्यम से उन्होंने स्टीरियोटैक्टिक बॉडी रेडियोथेरेपी (SBRT), इमेज-गाइडेड रेडियोथेरेपी, हृदय की सुरक्षा के लिए ब्रीथ-होल्ड तकनीक, हिप्पोकैम्पस-अवॉइडेंस होल-ब्रेन रेडियोथेरेपी तथा इमेजगाइडेड ब्रैकीथेरेपी जैसी आधुनिक तकनीकों की जानकारी दी। उन्होंने रेडिएशन थेरेपी से जुड़े कई भ्रम भी दूर किए और स्पष्ट किया कि रेडियोथेरेपी से मरीज रेडियोधर्मी नहीं हो जाते, यह केवल अंतिम चरण के कैंसर के लिए नहीं होती, और कई मामलों में उपचार एक से पाँच सत्रों में भी पूरा किया जा सकता है।
अपने संबोधन में डॉ. चुफाल ने कहा, “रेडिएशन ऑन्कोलॉजी में पिछले कुछ वर्षों में उल्लेखनीय बदलाव आया है। अब हमारा उद्देश्य केवल कैंसर का इलाज करना नहीं, बल्कि मरीज के अंगों की कार्यक्षमता और जीवन की गुणवत्ता को भी सुरक्षित रखना है। आधुनिक तकनीकों की मदद से हम अधिक सटीक उपचार दे सकते हैं, दुष्प्रभाव कम कर सकते हैं और मरीजों को सामान्य जीवन में जल्दी लौटने में मदद कर सकते हैं।”
दूसरा सत्र आरजीसीआईआरसी के वरिष्ठ सलाहकार, जेनिटो-यूरो ऑन्कोलॉजी, यूनिट-2, डॉ. अमिताभ सिंह ने “यूरोऑन्कोलॉजी में बेहतर कार्यक्षमता और जीवन की गुणवत्ता” विषय पर प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि मूत्र एवं प्रजनन तंत्र से जुड़े कैंसरों के उपचार में केवल बीमारी का इलाज ही नहीं, बल्कि मरीज की सामान्य कार्यक्षमता और जीवन की गुणवत्ता को बनाए रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। उन्होंने आधुनिक सर्जिकल तकनीकों, बहु-विषयक उपचार, पुनर्वास और रोगी-केंद्रित उपचार योजनाओं की भूमिका पर विस्तार से चर्चा की।
डॉ. अमिताभ सिंह ने कहा, “आज कैंसर उपचार की सफलता केवल मरीज के जीवित रहने से नहीं आंकी जाती। उपचार के बाद उसकी सामान्य शारीरिक कार्यक्षमता, मूत्र संबंधी स्वास्थ्य, यौन स्वास्थ्य और जीवन की गुणवत्ता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। समय पर पहचान, विशेषज्ञों की संयुक्त योजना और व्यक्तिगत उपचार से हम मरीजों को बेहतर परिणाम दे सकते हैं।”
कार्यक्रम में हल्द्वानी और आसपास के क्षेत्रों से आए चिकित्सकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। सत्रों के दौरान मरीजों के चयन, रेफरल प्रणाली, बहुविषयक उपचार योजना और आधुनिक तकनीकों के व्यावहारिक उपयोग जैसे विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई। प्रतिभागियों ने जटिल मामलों के प्रबंधन और बेहतर रोगी देखभाल से जुड़े अपने अनुभव भी साझा किए।
आरजीसीआईआरसी ने आईएमए हल्द्वानी और स्थानीय चिकित्सा समुदाय का उनके सहयोग और सक्रिय सहभागिता के लिए आभार व्यक्त किया। संस्थान देशभर में इस प्रकार के शैक्षणिक कार्यक्रमों के माध्यम से चिकित्सकों को कैंसर उपचार की नवीनतम जानकारी उपलब्ध कराने और सहयोगात्मक कैंसर देखभाल को मजबूत करने के लिए निरंतर कार्य कर रहा है।नैतिकता, सहानुभूति और उत्कृष्टता के अपने मूल्यों के साथ आरजीसीआईआरसी शोध, नवाचार, सतत चिकित्सा शिक्षा और बहुविषयक सहयोग के माध्यम से कैंसर उपचार को बेहतर बनाने तथा देशभर के मरीजों तक उच्च गुणवत्ता वाली ऑन्कोलॉजी सेवाएँ पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है।