भारत के हथकरघे पर बुना गया कोई भी वस्त्र खादी है यह सर्वस्वीकृत सत्य है
वाराणसी। खादी के साथ जुड़ी है हमारी आजादी। असली स्वदेशी कपड़ा है खादी, खादी बेरोजगारी हटाती है कपास, रेशम, ऊन के हाथ कते सूत से भारत के हथकरघे पर बुना गया कोई भी वस्त्र खादी है यह सर्वस्वीकृत सत्य है। खादी
वस्त्र शरीर को गर्मी में ठण्डे और सर्दी में गरम रखते है, जिससे मौसम के असर से बहुत हद तक राहत मिलती है, एक समय था जब खादी को साधारण माना जाता था, लेकिन आधुनिक समय में फैशन के साथ ही खादी की मांग दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है, खादी को आज हर उम्र के व्यक्ति पसंद कर रहे है, चाहे कालेज के विद्यार्थी या आफिस जाने वाली महिला पुस्ता।
उ०प्र० खादी तथा ग्रामोद्योग बोर्ड द्वारा आयोजित प्रदर्शनी अर्बन हॉट प्रांगण में हर किस्म के खादी उपलब्ध है, जिसमें खादी के स्टालों में ऊनी शाल, सिल्क की साडियां सूती खादी के वस्त्र, कम्बल, कुर्ता, शदरी गदद्दा, रजाई, चादर, कारपेट एवं सिलेसिलाये खादी के परिधान उपलब्ध हैं एवं ग्रामोद्योगी उत्पादों में लगने वाले स्टाल में जैम, जेली, आचार, मुरब्बा अगरबत्ती, नमकीन, लकड़ी के फर्नीचर, आलमारी, बक्सा आयुर्वेदिक औषधी दर्द निवारक तेल, दरी चमड़े के बैग, बेल्ट, जूता चप्पल इत्यादि उपलब्ध है।प्रदर्शनी में प्रतिदिन सायंकाल सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा हैं। प्रदर्शनी में अब तक की कुल बिकी 52.00 लाख रही।
जिला ग्रामोद्योग अधिकारी यू0पी0सिंह लोगो से एक बार प्रदर्शनी में परिवार सहित अवश्य आने और खरीदारी के साथ-साथ सांस्कृतिक कार्यक्रम का भी आनंद उठाये जाने की अपील की हैं।