वर्तमान वित्तीय वर्ष 22-23 में उत्तर रेलवे, लखनऊ मंडल को टिकट जांच के माध्यम से दिसम्बर माह तक कुल 7,57,049 बिना टिकट/अनियमित यात्रियों से कुल ₹56.18/- करोड़ रु. के राजस्व की प्राप्ति हुई है जो वार्षिक लक्ष्य ₹48.85 करोड़ रु. से अधिक है जबकि कोविड महामारी के पूर्व वित्तीय वर्ष 19-20 में दिसम्बर माह तक कुल बिना टिकट/अनियमित यात्रियों से कुल ₹41.85/- करोड़ रु. के राजस्व की प्राप्ति की थी । आंकड़ों के अनुसार, वर्तमान वित्त वर्ष के दौरान लखनऊ मंडल के वाणिज्य विभाग ने टिकट जांच के नियमित अभियानों एवं अन्य प्रकार की टिकट चेकिंग गतिविधियों को आयोजित करते हुए यह उपलब्धि अर्जित की है I महामारी के बाद अर्थव्यवस्था में सुधार होने से सभी गतिविधियों में तेजी आई है और सरकार के राजस्व में वृद्धि हुई है। रेलवे द्वारा टिकट जांच सदैव गतिशील रहने वाली ऐसी प्रणाली है जो विभिन्न रूपों में संपन्न की जाती है। ट्रेन में चल टिकट परीक्षकों (टीटीई) द्वारा नियमित टिकट जांच मुख्य रूप से नियमित तौर पर की जाती है। इसके अलावा, समय-समय पर विशेष प्रकार की अन्य जांचों का भी आयोजन किया जाता है जैसे, उड़न दस्तों द्वारा औचक चेक, किलाबंदी जांच, अधिकारियो द्वारा जाँच आदि। बिना टिकट यात्रा को रोकने के उद्देश्य से मंडल द्वारा पूरे मंडल पर नियमित अभियान चलाए जा रहे हैं। बिना टिकट/अनियमित यात्रा करने वाले वाले यात्रियों को दंडित किया जाता है और उन्हें जांच के दौरान उचित टिकट दिए जाते हैं। इसी क्रम में मंडल ने टिकट जांच द्वारा दिसम्बर माह 2022 में बिना टिकट/अनियमित यात्रा करने वाले 77,770 यात्रियों से कुल ₹5,70,46,563/- करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त करके एक उल्लेखनीय उपलब्धि अर्जित की है I टिकट जांच अभियान एक नहीं बल्कि दो उद्देश्यों को पूरा करता है। जहाँ एक तरफ यह बेटिकट यात्रियों पर अंकुश लगाता है, वहीं ऐसे यात्री जो अनजाने में टिकट नहीं ले पाए या फिर उचित श्रेणी का टिकट नहीं ले पाए, उन्हें उचित टिकट की सुविधा भी प्रदान करता है।
टिकट जांच अभियानों के दौरान टिकट जांच के अलावा, बिना बुक किए गए सामान की भी जांच की जाती है और गंदगी फैलाने वालों पर भी जुर्माना किया जाता है एवं यात्रियों को स्वच्छता के प्रति जागरूक करने का कार्य भी संपन्न किया जाता हैI यात्रियों से आग्रह है कि रेलवे स्टेशन पर अथवा ट्रेन में यात्रा के दौरान किसी भी सुझाव व सहायता के लिए रेलवे की हेल्पलाइन 139 का सैदव उपयोग करें |