अल्ट्राटेक के चेक डैम से सोनभद्र के झपरा और बिल्लि मरकुंडी गाँवों के किसानों को बड़ी राहत मिली
सोनभद्र: उत्तर प्रदेश के सोनभद्र ज़िले के झपरा गांव में अल्ट्राटेक सीमेंट लिमिटेड की इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग यूनिट डल्ला सीमेंट वर्क्स द्वारा बनाए गए चेक डैम से लगभग 200 किसानों को लाभ मिला है। यूनिट की सीएसआर टीम द्वारा बनाया गया यह 16 मीटर लंबा ड्रम चेक डैम गाँव में पानी की उपलब्धता बढ़ाने में मदद कर रहा है, जिससे सिंचाई भरोसेमंद हुई है और फ़सल उत्पादन में सुधार आया है।
यह परियोजना मई 2025 में शुरू की गई थी, जिसका लक्ष्य झपरा और आसपास के गाँवों में पानी की उपलब्धता को बेहतर करना था। इन इलाक़ों में कई सालों से अनियमित बारिश, पानी रोकने की संरचनाओं की कमी और मिट्टी कटाव के कारण लगातार जल संकट रहा है। स्थानीय प्रशासन और समुदाय के साथ मिलकर यूनिट की सीएसआर टीम ने यह प्रोजेक्ट मानसून शुरू होने से पहले, सिर्फ़ 28 दिनों में पूरा कर लिया। यह चेक डैम हर साल लगभग 15–20 लाख लीटर पानी संरक्षित करने में मदद करता है, जिससे भूजल पुनर्भरण होता है और स्थानीय पर्यावरण में नमी बनाए रखने में सुधार आता है।
इस चेक डैम से पहले, अल्ट्राटेक सीमेंट लिमिटेड की यूनिट ने 2024 में सोनभद्र ज़िले के बिल्ली मर्कुंडी गाँव में भी इसी तरह का जल संरक्षण उपाय लागू किया था। वहाँ बनाया गया 12 मीटर लंबा चेक डैम हर साल लगभग 11–12 लाख लीटर पानी संरक्षित करने में सक्षम है, जिससे 30 एकड़ से अधिक खेतों में सिंचाई की संभावना बनती है।
झपरा और बिल्ली मर्कुंडी, इन दोनों गाँवों में बने चेक डैमों ने किसानों को दो फ़सलें उगाने की दिशा में आगे बढ़ने में मदद की है। बढ़े हुए भूजल स्तर से फ़सल उत्पादकता में सुधार हुआ है और किसान अब बाज़ार की ज़रूरतों के अनुसार फसल विविधिकरण भी कर पा रहे हैं।
स्थानीय भू–आकृति और मौसमी जल प्रवाह के अनुसार तैयार किए गए ये चेक डैम बारिश के पानी को रोकते हैं और सतही बहाव को कम करते हैं। इससे भूजल पुनर्भरण और मिट्टी में नमी बेहतर हुई है, स्थानीय जलवायु परिस्थितियाँ संतुलित हुई हैं, और वनस्पति व जैव–विविधता को भी सहारा मिला है। इसके अलावा, दोनों गाँवों में 18,000 से अधिक लोगों को मानसून के बाद भी कई महीनों तक ताज़े पानी की उपलब्धता मिलती है। इससे बाहरी स्रोतों पर निर्भरता कम हुई है और घर–परिवार एवं पशुधन की पानी की ज़रूरतें स्थानीय स्तर पर ही पूरी हो पा रही हैं।
अल्ट्राटेक सीमेंट लिमिटेड की जल प्रबंधन पहल इस विचार पर आधारित है कि पानी एक अत्यंत महत्वपूर्ण संसाधन है—व्यापार संचालन के लिए भी और समुदाय तथा जैव–विविधता की भलाई के लिए भी। इसी सोच के अनुरूप, अल्ट्राटेक की जल प्रबंधन गतिविधियाँ उसके परिसर के भीतर और बाहर—दोनों जगहों पर लागू होती हैं। इनमें इसकी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट भी शामिल हैं और वे समुदाय भी जहाँ कंपनी काम करती है।समुदायों में, यह प्रयास जल संरक्षण पहलों और एकीकृत वॉटरशेड परियोजनाओं के रूप में दिखाई देते हैं। वित्त वर्ष 2025 में, अल्ट्राटेक ने अपनी यूनिट्स और स्थानीय समुदायों—दोनों में किए गए हस्तक्षेपों के माध्यम से कुल मिलाकर 120 मिलियन घन मीटर से अधिक पानी संरक्षण हासिल किया।वित्त वर्ष 2025 में ही, अल्ट्राटेक ने अपनी घोषित प्रतिबद्धताओं के अनुरूप 4.9 गुना पानी-पॉज़िटिव स्थिति प्राप्त की।
भारत में अल्ट्राटेक सीमेंट लिमिटेड की सात इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग यूनिट इंटीग्रेटेडकम्युनिटी वॉटरशेड परियोजनाएँ लागू करती हैं। ये पहल पानी संरक्षण और ग्रामीण आजीविका की सस्टेनेबल व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए समग्र दृष्टिकोण अपनाती हैं, जिसमें स्थानीय बारिश के पैटर्न को ध्यान में रखते हुए रेनवॉटर हार्वेस्टिंग की क्षमता को अधिकतम किया जाता है। इन प्रयासों के जरिए, अल्ट्राटेक ने कुल 16.2 मिलियन क्यूबिक मीटर की क्षमता वाले रेनवॉटर हार्वेस्टिंग ढाँचे विकसित कराने में मदद की है। इसके अलावा, वित्त वर्ष 2025 में कंपनी के संयंत्रों और खदानों में 80 मिलियन क्यूबिक मीटर से अधिक पानी संग्रहित किया गया। कंपनी कृषि-प्रधान गाँवों में कम पानी में हो जाने वाली सिंचाई तकनीकों को भी बढ़ावा देती है, जिससे समुदाय स्तर पर पानी का सस्टेनेबल उपयोग सुनिश्चित हो सके।
अल्ट्राटेक अपनी सभी सामाजिक पहल आदित्य बिरला सेंटर फॉर कम्युनिटी इनिशिएटिव्स एंड रूरल डेवलपमेंट के मार्गदर्शन में चलाता है, जिसकी चेयरपर्सन राजश्री बिरला हैं। अल्ट्राटेक के सीएसआर के प्रमुख क्षेत्र शिक्षा, स्वास्थ्य, सस्टेनेबल लाइफ, सामुदायिक अवसंरचना और सामाजिक कारण हैं। कंपनी 16 राज्यों के 500 से अधिक गाँवों में 18 लाख से अधिक लोगों तक पहुँच बनाती है।