एमएसएमई ने जीएसटी सुधारों का समर्थन किया

लखनऊ। भारत के आर्थिक विकास, निर्यात और रोजगार को गति देने में एमएसएमई की महत्वपूर्ण भूमिका बनी हुई है। ऐसे में, जीएसटी को लेकर उनके दृष्टिकोण में भी बदलाव आया है, यह अनुपालन की अनिवार्यता से बढ़कर अब औपचारिकता और परिचालन दक्षता को बढ़ावा देने वाला माध्यम बन गया है। हालांकि, सरल रिटर्न फाइलिंग और कर सीमा में छूट जैसे सुधारों ने अनुपालन को आसान बनाया है, लेकिन व्यवसाय जीएसटी के अगले चरण से उम्मीद करते हैं कि इसमें नकदी बढ़ाने, इनपुट टैक्स क्रेडिट नियमों को सरल बनाने और कार्यशील पूंजी के दबाव को कम करने को प्राथमिकता दी जाएगी। डेलॉइट इंडिया के जीएसटी/9 सर्वे द नेक्स्ट फेज जीएसटी 2.0 के अनुसार, एमएसएमई अब अपनाने से आगे बढ़कर अनुकूलन की ओर देख रहे हैं। सर्वे के निष्कर्ष नकदी में सुधार और अनुपालन को सरल बनाने के उद्देश्य से किए गए सुधारों के लिए मजबूत समर्थन दर्शाते हैं।

गोकुल चैधरी, प्रेसिडेंट, टैक्स, डेलॉइट साउथ एशिया ने भारत के एमएसई इकोसिस्टम को मजबूत करने में जीएसटी की भूमिका पर कहा, भारत के एमएसएमई हमारे देश के कुल उत्पादन का एक-तिहाई हिस्सा तैयार करते हैं और इसके कुल निर्यात में लगभग आधा योगदान देते हैं। देश की सप्लाई चेन के कामकाज और एक पारदर्शी, औपचारिक इकोसिस्टम बनाने में जीएसटी एक प्रमुख उत्प्रेरक है। अगली पीढ़ी के सुधारों को रिफंड में सुधार करके, इनपुट टैक्स क्रेडिट नियमों को सरल बनाकर और क्रेडिट के निर्बाध उपयोग को सक्षम करके दक्षता और नकदी को बढ़ावा देना चाहिए। कर प्रतिस्पर्धात्मकता व्यवसायों को तेजी से बढ़ने में सक्षम बना सकती है और वैश्विक विनिर्माण एवं सेवा केंद्र के रूप में भारत की स्थिति को मजबूत कर सकती है।

महेश जयसिंग, पार्टनर एवं डेलॉइट इंडिया के इनडायरेक्ट टैक्स लीडर ने कहा, भारत के एमएसएमई ने इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर से उत्पन्न होने वाली कार्यशील पूंजी की बाधाओं को दूर करने की आवश्यकता पर भी प्रकाश डाला है। लगभग 69 प्रतिशत उत्तरदाता इनपुट सेवाओं और पूंजीगत वस्तुओं को शामिल करने के लिए इनवर्टेड ड्यूटी रिफंड व्‍यवस्‍था के विस्तार का समर्थन करते हैं, जबकि 63 प्रतिशत इनवर्जन से जुड़ी विसंगतियों को कम करने के लिए जीएसटी दरों को और अधिक तर्कसंगत बनाने के पक्ष में हैं। इसके अतिरिक्त, 51 प्रतिशत एसमएसई संचित आईटीसी शेष के साल के अंत में रिफंड का समर्थन करते हैं, और 49 प्रतिशत पिछली अवधियों के लिए अनंतिम रिफंड शुरू करने का समर्थन करते हैं।

लगभग 89 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने विलंबित जीएसटी रिफंड और प्री-डिपॉजिट पर ब्याज के स्वतः भुगतान का समर्थन किया, जबकि 88 प्रतिशत ने इनवॉइस-आधारित आईटीसी पात्रता और 87 प्रतिशत ने तिमाही कर भुगतान व्‍यवस्‍था का समर्थन किया। एमएसएमई के बीच तिमाही रिटर्न फाइलिंग सबसे व्यापक समर्थन हासिल करने वाला जीएसटी सुधार बनकर उभरा है, जिसकी लोकप्रियता 2023 में 12 प्रतिशत से बढ़कर 2026 में पाँच गुना से अधिक, 67 प्रतिशत हो गई है। व्यापक प्रणालीगत सुधारों की भी मजबूत मांग है, जिसमें 72 प्रतिशत उत्तरदाता एक केंद्रीयकृत ऑडिट प्रणाली का समर्थन कर रहे हैं, 70 प्रतिशत इनपुट टैक्स क्रेडिट के माध्यम से रिवर्स चार्ज मैकेनिज्म देनदारियों के भुगतान का समर्थन करते हैं, और 64 प्रतिशत व्यवसाय करने में आसानी को बढ़ावा देने के लिए लक्षित छूटों के साथ एक सरल जीएसटी दर व्‍यवस्‍था की मांग कर रहे हैं। चूंकि भारत अपनी 10 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर की अर्थव्यवस्था के लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है, जीएसटी सुधारों का अगला चरण एक सरल, अधिक पूर्वानुमानित और विकास-उन्मुख टैक्स इकोसिस्टम बनाने का एक महत्वपूर्ण अवसर प्रस्तुत करता है, जो एमएसएमई को आत्मविश्वास के साथ निवेश, नवाचार और विस्तार करने के लिए सशक्त बनाएगा।

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