12 अगस्त से एनएसई शुरू करेगा निफ्टी इंडिया एफपीआई 150 इंडेक्स पर डेरिवेटिव्स

मुंबई:नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) को निफ्टी इंडिया एफपीआई 150 इंडेक्स (निफ्टीएफपीआई) पर डेरिवेटिव्स शुरू करने के लिए नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ऑफ इंडिया (सेबी) से मंजूरी मिल गई है। एनएसई की योजना 12 अगस्त, 2026 से इक्विटी डेरिवेटिव्स सेगमेंट में इन कॉन्ट्रैक्ट्स की शुरुआत करने की है।
इसमें लगातार तीन महीने की अवधि वाले इंडेक्स फ्यूचर्स और इंडेक्स ऑप्शंस कॉन्ट्रैक्ट्स उपलब्ध होंगे। इनका सेटलमेंट नकद (कैश) में होगा और हर महीने के आखिरी मंगलवार को इनकी एक्सपायरी होगी। इस मौके पर एनएसई के चीफ बिजनेस डेवलपमेंट ऑफिसर श्री श्रीराम कृष्णन ने कहा, “निफ्टी इंडिया एफपीआई 150 इंडेक्स पर डेरिवेटिव्स शुरू होने से हमारे मौजूदा इंडेक्स डेरिवेटिव्स पोर्टफोलियो को और मजबूती मिलेगी। निफ्टी इंडिया एफपीआई 150 इंडेक्स में भारतीय शेयर बाजार के 150ऐसे प्रमुख शेयर शामिल हैं, जिनमें अच्छी खरीद-बिक्री होती है और जिनमें निवेश करना आसान है। अलग-अलग सेक्टर्स की कंपनियाँ शामिल होने की वजह से यह इंडेक्स निवेशकों को जोखिम कम करने और अपने निवेश को संतुलित रखने में मदद कर सकता है।”
निफ्टी इंडिया एफपीआई 150 इंडेक्स को इस तरह तैयार किया गया है कि यह निफ्टी 500 में शामिल उन 150 बड़ी कंपनियों के प्रदर्शन को दर्शाए, जिनमें विदेशी निवेशकों के लिए निवेश करना आसान हो। इन कंपनियों का चयन पिछले छह महीनों के औसत फॉरेन इन्वेस्टिबल फ्री-फ्लोट मार्केट कैपिटलाइजेशन के आधार पर किया जाता है। इसमें उन्हीं कंपनियों को जगह मिलती है, जिनके शेयर्स में अच्छी खरीद-बिक्री होती है और जिनमें निवेश के लिए पर्याप्त शेयर उपलब्ध रहते हैं। इंडेक्स में हर कंपनी की हिस्सेदारी उसके फॉरेन इन्वेस्टिबल फ्री-फ्लोट मार्केट कैपिटलाइजेशन के आधार पर तय की जाती है।
जून 2026 तक के आँकड़ों के अनुसार, इस इंडेक्स में सबसे ज्यादा हिस्सेदारी फाइनेंशियल सर्विसेस सेक्टर की रही, जिसका वेटेज 26.15प्रतिशत है। इसके बाद ऑइल, गैस एंड कंज्यूमेबल फ्यूल्स सेक्टर का वेटेज 10.03प्रतिशत और हेल्थकेयर सेक्टर का 7.51प्रतिशत रहा।
इस इंडेक्स की शुरुआत 16 अगस्त, 2025 को की गई थी। इसकी बेस डेट 3 अक्टूबर, 2022 और बेस वैल्यू 1000 तय की गई थी। इंडेक्स में कंपनियों का चयन फॉरेन इन्वेस्टिबल फ्री-फ्लोट के आधार पर किया जाता है और हर तीन महीने में इसकी समीक्षा कर जरूरी बदलाव किए जाते हैं।

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