हर महीने दवाओं पर होने वाले खर्च पर ध्यान क्यों नहीं जाता और इसकी कीमतों की तुलना से क्या फर्क पड़ सकता है
बेंगलुरु: ज्यादातर परिवार किराने के खर्च का हिसाब रखते हैं, लेकिन दवाओं पर हर महीने कितना खर्च होता है, यह बहुत कम लोग बता पाते हैं, भले ही यह बिल सालों तक हर महीने आता रहे। अफोर्डेबल क्रॉनिक मेडिकेशंस प्लेटफॉर्म प्लैटिनमआरएक्स (PlatinumRx) के मुताबिक, इस अनदेखी की वजह से भारतीय परिवारों को अंदाजे से कहीं ज्यादा खर्च उठाना पड़ रहा है।अगर हर महीने 5,000 रुपये डायबिटीज या हाइपरटेंशन की दवाओं पर खर्च हो रहे हैं, तो सालाना यह रकम 60,000 रुपये बैठती है। छोटी-छोटी मासिक किस्तों में होने के कारण अक्सर इस पर सवाल नहीं उठता। प्लैटिनमआरएक्स (PlatinumRx) जीएमपी-सर्टिफाइड मैन्युफैक्चरर्स से सीधे समान साल्ट वाली दवाएं लेकर डिस्ट्रीब्यूटर और स्टॉकिस्ट का मार्जिन हटाता है। इससे खर्च 60% तक कम हो सकता है, यानी 5,000 रुपये का महीना करीब 2,000 रुपये में सिमट सकता है।यह अंतर विकल्पों की कमी की वजह से नहीं, बल्कि इसलिए बना हुआ है क्योंकि ज्यादातर मरीजों को यह तुलना कभी दिखाई ही नहीं जाती कि वे कितना चुका रहे हैं और वही दवा दूसरी जगह कितने में मिल रही है।प्लैटिनमआरएक्स (PlatinumRx) के को-फाउंडर आशुतोष पांडेय ने कहा, “ज्यादातर परिवारों को यह पता ही नहीं चलता कि किसी क्रॉनिक बीमारी पर साल भर में कितना खर्च हो रहा है। हमने प्लैटिनमआरएक्स इसलिए शुरू किया, ताकि यह रकम उनके लिए न तो चौंकाने वाली हो और न ही बोझ बने।”
अब तक 10 लाख से ज्यादा यूजर्स प्लैटिनमआरएक्स के जरिए कुल 137 करोड़ रुपये बचा चुके हैं। कीमतों की तुलना को आसान बनाने से ग्राहकों की आदतों में भी बदलाव आया है और कंपनी के मासिक ऑर्डर्स में 70% रिपीट ऑर्डर्स हैं। प्लेटफॉर्म फिलहाल नौ वेयरहाउस के जरिए 19,000 पिन कोड्स पर डिलीवरी कर रहा है, जबकि छह और वेयरहाउस तैयार किए जा रहे हैं।2023 में आईआईटी और आईआईएम के पूर्व छात्रों आशुतोष पांडेय और पीयूष कुमार ने प्लैटिनमआरएक्स (PlatinumRx) की शुरुआत की थी। कंपनी फार्मास्युटिकल मैन्युफैक्चरर्स के साथ सीधे काम करती है और लंबे समय के इलाज की लागत बढ़ाने वाले बिचौलियों को हटाने पर जोर देती है।डॉक्टर द्वारा लिखी गई दवा का ब्रांड बदलने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें, खासकर क्रॉनिक या जटिल बीमारी के इलाज के दौरान।