वाराणसी: आरसीएम की रूपांतरण यात्रा, जिसमें अब तक देश के 20 शहरों में एक लाख से अधिक नागरिक जुड़ चुके हैं, 18 नवम्बर को वाराणसी पहुँचेगी।16 सितंबर 2025 को राजस्थान के भीलवाड़ा से आरसीएम के 25वें स्थापना वर्ष के उपलक्ष्य में शुरू हुई यह यात्रा सभी अपेक्षाओं से आगे निकल चुकी है और अब एक जन-आंदोलन का रूप ले चुकी है।अब तक की यात्रा के उत्साह को देखते हुए उम्मीद है कि वाराणसी में इस यात्रा को और भी ज़्यादा जनसमर्थन मिलेगा, जहाँ हर उम्र और वर्ग के नागरिक सक्रिय भागीदारी करेंगे।इस यात्रा के दौरान आम नागरिक बच्चे, महिलाएं और परिवार स्वास्थ्य सेवा और संस्कार जैसे मुख्य सिद्धांतों को अपनाने का संकल्प ले रहे हैं। उन्होंने स्वस्थ जीवनशैली, जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों से बचाव और समाज सेवा के महत्व के बारे में सीखा है।“रूपांतरण यात्रा आरसीएम के 25 वर्षों की उपलब्धियों का उत्सव है और उन असंख्य सह-खरीदारों के आत्मनिर्भरता और आर्थिक स्वतंत्रता की भावना को सलाम है आरसीएम के मैनेजिंग डायरेक्टर सौरभ छाबड़ा ने कहा। इस यात्रा के माध्यम से हम नए सदस्यों को एक मूल्य-आधारित, जन-संचालित यात्रा से जुड़ने के लिए प्रेरित करना चाहते हैं।रूपांतरण यात्रा केवल परिवर्तन की यात्रा नहीं, बल्कि सशक्तिकरण का आंदोलन है मैनेजिंग डायरेक्टर प्रियंका अग्रवाल ने कहा। जब महिलाएं शक्ति, दृष्टि और करुणा के साथ आगे बढ़ती हैं, तो वे न केवल अपना भविष्य गढ़ती हैं, बल्कि राष्ट्र की दिशा भी बदल देती हैं।एफएमसीजी और हेल्थ से लेकर फैशन और लाइफस्टाइल तक, आरसीएम के उत्पाद गर्व से मेड इन इंडिया हैं और उच्च गुणवत्ता मानकों पर खरे उतरते हैं सीईओ मनोज कुमार ने कहा। रूपांतरण यात्रा के माध्यम से हम करोड़ों लोगों को सशक्त बनाने और एक स्वस्थ, मजबूत भारत के निर्माण में योगदान देने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।वाराणसी में यह भव्य आयोजन सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय खेल मैदान, जगतगंज, चौकाघाट, वाराणसी पर आयोजित किया जाएगा, जहाँ बड़ी संख्या में लोगों के आने की उम्मीद है।
अब तक 2,000 से अधिक लोगों ने स्वेच्छा से रक्तदान भी किया है, जो समाज के प्रति गहरी जिम्मेदारी और अपनत्व की भावना को दर्शाता है। यह संख्या दिसंबर 23, 2025 को यात्रा के समापन तक और बढ़ने की संभावना है।
रूपांतरण यात्रा की सफलता का मूल कारण है आम जनता की सच्ची और स्वप्रेरित भागीदारी। स्वास्थ्य जागरूकता पर केंद्रित इस यात्रा में मधुमेह, उच्च रक्तचाप, थायरॉइड और उच्च कोलेस्ट्रॉल जैसी जीवनशैली बीमारियों पर व्यावहारिक सत्रों और चिकित्सा शिविरों के माध्यम से जागरूकता फैलाई जा रही है।
यह 100 दिनों की, 17,000 किलोमीटर लंबी राष्ट्रव्यापी यात्रा 75 शहरों का दौरा करेगी और 25 भव्य समारोहों का आयोजन करेगी। यह अभियान आरसीएम के उस दृष्टिकोण को सशक्त करता है कि कंपनी केवल डायरेक्ट सेलिंग तक सीमित नहीं है, बल्कि एक जन-केंद्रित और मूल्य-आधारित आंदोलन है।
“जब लोग बिना किसी अपेक्षा के सेवा के लिए आगे आते हैं, तो वह एक आयोजन नहीं बल्कि जागरण होता है,” रूपांतरण यात्रा के मार्गदर्शक तिलोकचंद छाबड़ा ने कहा। उन्होंने आगे कहा, “यह आंदोलन हमें दिखा रहा है कि सच्चा परिवर्तन तभी शुरू होता है जब नागरिक अपने जीवन में स्वास्थ्य, सेवा और संस्कार को अपनाते हैं।”
भारत की अग्रणी डायरेक्ट सेलिंग कंपनी आरसीएम ने वर्ष 2000 में अपने संचालन की शुरुआत की थी। आज यह 2,400 करोड़ के कारोबार वाला प्रतिष्ठान बन चुका है वह भी बिना किसी वेंचर कैपिटल या बाहरी फंडिंग के। यह इसकी सह-खरीदारों की भागीदारी और उपभोक्ताओं के भरोसे का परिणाम है।
आरसीएम के 400 से अधिक उत्पादों के पोर्टफोलियो की विशेषता यह है कि इनमें पाम ऑयल का उपयोग नहीं किया जाता। इसके बजाय राइस ब्रान ऑयल का उपयोग किया जाता है, जिसमें गामा ओरीज़नॉल नामक प्राकृतिक एंटीऑक्सीडेंट होता है, जो उच्च कोलेस्ट्रॉल को कम करने में मदद करता है।
कार्यक्रम दो भागों में होगा सुबह स्वास्थ्य और सेवा संबंधी गतिविधियाँ और शाम को उत्सव एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम।
आगंतुकों को आरसीएम का संपूर्ण अनुभव देने के लिए एक रूपांतरण मेला भी आयोजित किया जाएगा जिसमें कंपनी के विभिन्न उत्पादों को इंटरएक्टिव बूथों के माध्यम से प्रदर्शित किया जाएगा। इसमें हेल्थ ज़ोन (Nutricharge और Gamma उत्पाद श्रृंखला) और KeySoul Pavilion (महिला परिधान और फुटवियर) शामिल होंगे।
फूड कोर्ट में आरसीएम के स्वेच्छा और गुड डॉट ब्रांड्स से बने स्वादिष्ट और स्वास्थ्यवर्धक व्यंजन उपलब्ध रहेंगे। इसके साथ ही एक विशेष रक्तदान शिविर भी आयोजित किया जाएगा जिसमें बड़ी संख्या में लोग भाग लेंगे।
हाल ही में प्रकाशित पुस्तक “मनसा वाचा कर्मणा एक कर्मयोगी की जीवनी जो आरसीएम के संस्थापक तिलोकचंद छाबड़ा के जीवन पर आधारित है, कार्यक्रम का एक प्रमुख आकर्षण होगी। यह पुस्तक उनके जीवन के कर्मयोग और उनके विचारों व कार्यों के करोड़ों लोगों पर पड़े प्रभाव को दर्शाती है।अब तक जिन 20 शहरों में यात्रा हो चुकी है उन्हें देखकर कहा जा सकता है कि वाराणसी इस आंदोलन को एक नया आयाम देगा केवल संख्याओं में नहीं बल्कि सहभागिता की भावना और गहराई में भी।