आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल लाइफ इंश्योरेंस ने प्रौद्योगिकी और स्वचालन के ज़रिए लागत कम करने के अन्य उपायों में निरंतर निवेश किया है। इसकी वजह से वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में बचत व्यवसाय के लिए उसका लागत अनुपात (कॉस्ट-टू-प्रीमियम रेशियो) घटकर 13.6% रह गया है। कंपनी का व्यवसाय बढ़ने के बावजूद, पिछले साल के मुकाबले इसमें 50 आधार अंक की कमी आई है। आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल लाइफ इंश्योरेंस के चीफ टेक्नोलॉजी ऑफिसर, श्री गणेशन सौंदिरम ने इस बारे में अपनी टिप्पणी में कहा, “आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल लाइफ इंश्योरेंस में, कंपनी के डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर को मज़बूत करने के लिए किए गए निवेश से न सिर्फ हमारे ग्राहकों का सशक्तिकरण हुआ है, बल्कि हमें भी पॉलिसी के पूरे सफर के दौरान उन्हें बेहतर अनुभव प्रदान करने में मदद मिली है। हम ग्राहक बनाने, वितरक की क्षमता बढ़ाने, सेवा प्रदान करने और परिचालन क्षमता को बेहतर बनाने के लिए एआई, एनालिटिक्स और आईसीआईसीआई प्रू पार्टनर स्टैक, आईपीआरयू एज जैसे प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर रहे हैं।”
उन्होंने कहा, “जब हमने अपना टेक्नोलॉजी स्टैक बनाया था, तो हमारा लक्ष्य सिर्फ स्वचालन करना नहीं था। हमारा लक्ष्य था मैनुअल प्रक्रिया से होने वाली दिक्कतों और लागत को कम करना, ताकि बचत का लाभ बेहतर तरीके से ग्राहकों तक पहुँचाया जा सके और उन्हें तेज़ी एवं आसानी से सेवा मिले। इसी दृष्टिकोण से अब परिचालन क्षमता को बेहतर बनाने में मदद मिल रही है।”यह क्षमता काफी हद तक इस बात पर ज़ोर देने से आई है कि पॉलिसी के लिए आवेदन से इसके जारी होने तक प्रक्रिया किस तरह आगे बढ़ती है। वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में, डिजिटल केवायसी का इस्तेमाल कर जारी की गई लगभग 58% पॉलिसी और बचत संबंधी पॉलिसी में से लगभग 54% पॉलिसी उसी दिन जारी कर दी गईं। कंपनी डिजिटल दावा पंजीकरण के ज़रिए तेज़ी से दावा निपटान में मदद देती है। इसमें चैटबॉट ‘आस्क खुशमणि’, व्हाट्सऐप और एआई-आधारित दावा-पूर्व आकलन और प्रसंस्करण के ज़रिए रियल-टाइम ट्रैकिंग की सुविधा मिलती है।अंडरराइटिंग फैसलों में मदद करने वाले एआई-आधारित मॉडल का इस्तेमाल पॉलिसी निरंतरता का अनुमान लगाने और दावे का आकलन करने के लिए भी किया जाता है। इससे वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही दौरान बिना जाँच वाले व्यक्तिगत दावे के लिए औसतन सिर्फ एक दिन के टर्नअराउंड समय के साथ 99.3% का उद्योग अग्रणी दावा निपटान अनुपात हासिल हुआ है। रोज़मर्रा की सेवा का बड़ा हिस्सा कंपनी के एआई-आधारित चैटबॉट ‘आस्क खुशमणि’ के ज़रिए संभाला जाता है। वहीं, नवीकरण (रिन्यूअल) के रिमाइंडर मल्टीलिंगुअल (कई भाषाएँ बोलने वाले) वॉयस असिस्टेंट के ज़रिए भेजे जाते हैं, जो एक घंटे में 50,000 ग्राहकों तक पहुँच सकता है। भारतीय बीमा क्षेत्र में ऐसी सुविधाएँ बहुत कम ही देखने को मिलती हैं।वितरण के मामले में, कंपनी के सलाहकार ‘आईपीआरयू एज’ सलाहकार ऐप जैसे टूल का इस्तेमाल करते हैं। इससे उन्हें अपना व्यवसाय तेज़ी से बढ़ाने, परिचालन प्रबंधन, आवेदन वाले दिन ही पॉलिसी जारी करने और ग्राहकों को बेहतर अनुभव देने में मदद मिलती है।आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल लाइफ ग्राहकों की सेवा के 25 साल पूरे कर रही है। ऐसे में, आने वाले सालों में मुनाफे के साथ आगे बढ़ने की कंपनी की रणनीति में टेक्नोलॉजी पर आधारित यह तरीका महत्वपूर्ण बना हुआ है।