मेड इन इंडिया’ रोबोटिक तकनीक का कमाल, एसएसआई मंत्रा ने 22,000 किमी दूर कोलंबिया से इंदौर के बीच की ऐतिहासिक सर्जरी

नई दिल्ली: भारत की विकसित रोबोटिक तकनीक और भारतीय डॉक्टरों की विशेषज्ञता ने एकबार फिर दुनिया को चौंका दिया है।एसएस इनोवेशंस इंटरनेशनल (SS Innovations International) के ‘मेड इन इंडिया’ एसएसआई मंत्रा सर्जिकल रोबोटिक सिस्टम की मदद से कोलंबिया से लगभग22,000 किलोमीटर दूर बैठे सर्जनों नेइंदौरमें एक मरीज की सफल रोबोटिक स्लीव गैस्ट्रेक्टॉमी सर्जरी कर दुनिया के सामने भारतीय तकनीक का परचम फैराया है।
यह ऐतिहासिक टेलीसर्जरी कोलंबिया के हॉस्पिटल इंटरनैशनल डी कोलंबिया और इंदौर स्थित मोहक बैरियाट्रिक्स एंड रोबोटिक्स के बीच लगभग 22,000 किमी लंबे फाइबर नेटवर्क पर संपन्न हुई। यह उपलब्धि इस बात का प्रमाण है कि अब अत्याधुनिक सर्जरी के लिए भौगोलिक दूरी बाधा नहीं रह गई है।
सर्जरी का दूरस्थ संचालन एसएस इनोवेशंस इंटरनेशनल के संस्थापक, चेयरमैन एवं सीईओ डॉ. सुधीर श्रीवास्तव ने डॉ. विक्टर राउल कैस्टिलो मैन्टिला और डॉ. जोनाथन कासेरेस प्राडा के साथ मिलकर कोलंबिया से किया। वहीं इंदौर में मरीज के साथ मौजूद सर्जिकल टीम का नेतृत्व प्रसिद्ध बैरियाट्रिक सर्जन डॉ. मोहित भंडारी ने किया। उनके साथ डॉ. अभिषेक तिवारी भी मौजूद रहे जिन्होंने पूरी प्रक्रिया को सफलतापूर्वक अंजाम दिया।
पूरी सर्जरी लगभग 275–285 मिलीसेकंड की नेटवर्क लेटेंसी (राउंड ट्रिप टाइम) पर संपन्न हुई, जिसने एसएसआई मंत्रा प्लेटफॉर्म की सटीकता, स्थिरता और विश्वसनीयता को वैश्विक स्तर पर साबित किया।
यह उपलब्धि स्वास्थ्य सेवाओं के विकेंद्रीकरण की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है। रोबोटिक टेलीसर्जरी के माध्यम से विशेषज्ञ सर्जन अब देश-दुनिया के दूरस्थ अस्पतालों में बैठे मरीजों का ऑपरेशन कर सकेंगे। इससे ग्रामीण और छोटे शहरों के मरीजों को महानगरों की यात्रा किए बिना विश्वस्तरीय उपचार उपलब्ध हो सकेगा। साथ ही सर्जिकल प्रशिक्षण, विशेषज्ञ मार्गदर्शन और जटिल ऑपरेशन की पहुंच भी व्यापक होगी।
विदेशी रोबोटिक सर्जरी सिस्टम की तुलना में एसएसआई मंत्रा को पूरी तरह भारत में विकसित और निर्मित किया गया है। इसकी खरीद और संचालन लागत अपेक्षाकृत कम है, जिससे अधिक अस्पताल रोबोटिक सर्जरी अपनाने में सक्षम होंगे। यह तकनीक टियर-2 और टियर-3 शहरों तक उन्नत स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी और भारत को सर्जिकल रोबोटिक्स के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व की ओर अग्रसर करेगी।
इस उपलब्धि पर बात करते हुए एसएस इनोवेशंस इंटरनेशनल के संस्थापक, चेयरमैन एवं सीईओ डॉ. सुधीर श्रीवास्तव ने कहा कि, “कोलंबिया और भारत के बीच हुई यह सफल टेलीसर्जरी साबित करती है कि गुणवत्तापूर्ण सर्जिकल उपचार के लिए अब भौगोलिक दूरी कोई बाधा नहीं रही। हमारा उद्देश्य हमेशा ऐसा ‘मेड इन इंडिया’ रोबोटिक प्लेटफॉर्म विकसित करना रहा है, जो विश्वस्तरीय प्रदर्शन के साथ-साथ दुनिया भर के अस्पतालों के लिए किफायती और सुलभ भी हो। हमारी हर उपलब्धि विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाओं को मरीजों के और करीब लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।”
मोहक बैरियाट्रिक्स एंड रोबोटिक्स, इंदौर के संस्थापक एवं निदेशक डॉ. मोहित भंडारीने कहा कि, “यह सर्जरी दिखाती है कि रोबोटिक टेलीसर्जरी भविष्य की स्वास्थ्य व्यवस्था को पूरी तरह बदल सकती है। अब उत्कृष्ट चिकित्सा संस्थानों की विशेषज्ञता सीमाओं में बंधी नहीं रहेगी। एसएसआई मंत्रा की किफायती लागत और बहुउद्देश्यीय क्षमता इसे भारत ही नहीं, बल्कि विकासशील देशों में भी रोबोटिक सर्जरी के विस्तार का प्रभावी माध्यम बनाती है।”
भारत बन रहा है ग्लोबल रोबोटिक सर्जरी हब:- कोलंबिया और इंदौर के बीच यह सफल टेलीसर्जरी केवल एक तकनीकी उपलब्धि नहीं, बल्कि यह संकेत है कि भारत स्वदेशी नवाचार के दम पर वैश्विक स्वास्थ्य सेवाओं का भविष्य बदलने की क्षमता रखता है। उन्नत रोबोटिक्स, हाई-स्पीड नेटवर्क और विशेषज्ञ चिकित्सा के संयोजन से एसएस इनोवेशंस इंटरनेशनल ऐसा वैश्विक इकोसिस्टम तैयार कर रहा है, जहां सीमाओं के पार भी मरीजों को उच्च गुणवत्ता वाली सर्जिकल सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकें।

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